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25 May 2024 · 1 min read

कुछ बेनाम कविताएं

रहने दो उन्हे बेनाम कविताएं
झाड़ों के झुरमुट में लिपटी लताएं,

सुलझाने की कोशिश न करना
क्यों रहने दो उलझी हम बताएं,

वो उलझी ही सुंदर हैं
एहसासों से सराबोर कविताएं,

क्या नाम दे उन्हें
नाम तय नहीं कर पायेगा कविताएं,

बेनाम ही सुंदर हैं
वो उलझी उलझी कविताएं,

अनामिका ही रहे
मेरी वो अनकही कविताएं ।।।

पद्मज़ा राघव

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