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25 May 2024 · 2 min read

दोस्ती का मर्म (कविता)

दोस्ती का मर्म

दोस्ती है नाता रूह का
ना इसकी है कोई परिभाषा
दोस्ती है दिल की धड़कन
रिश्ता है यह एक सरगम सा
दोस्ती है मरहम हर जख्म का
इसमें रंग है हर सार का
मगर कहां है आज वो दोस्त
दोस्ती पर मर मिटने वाले
बस किसी से किसी की यारी नहीं
सब वक्त का फेर है
झूठ है फरेब है
दोस्ती के अब कई अर्थ हैं
कौन देता भला दोस्ती की वो भाषा
जो सुदामा और कृष्ण जैसी हो
आंखों में अश्रुधार कहां
आज सुदामा जैसा यार कहां
अश्रु निर से जो धोए कदम
पैर पकड़ रोये जो कान्हा
आज कहां वह यारी है
प्यारी जो कृष्ण सुदामा जैसी हो
दोस्ती तो है मन का नाता
कहां है इसकी कोई परिभाषा
दोस्ती का कहां होता है तन से नाता जन्मो -जन्मो से है यह तो दिलों का नाता
ता रूह का
ना इसकी है कोई परिभाषा
दोस्ती है दिल की धड़कन
रिश्ता है यह एक सरगम सा
दोस्ती है मरहम हर जख्म का
इसमें रंग है हर सार का
मगर कहां है आज वो दोस्त
दोस्ती पर मर मिटने वाले
बस किसी से किसी की यारी नहीं
सब वक्त का फेर है
झूठ है फरेब है
दोस्ती के अब कई अर्थ हैं
कौन देता भला दोस्ती की वो भाषा
जो सुदामा और कृष्ण जैसी हो
आंखों में अश्रुधार कहां
आज सुदामा जैसा यार कहां
अश्रु निर से जो धोए कदम
पैर पकड़ रोये जो कान्हा
आज कहां वह यारी है
प्यारी जो कृष्ण सुदामा जैसी हो
दोस्ती तो है मन का नाता
कहां है इसकी कोई परिभाषा
दोस्ती का कहां होता है तन से नाता जन्मो -जन्मो से है यह तो दिलों का नाता

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