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25 May 2024 · 1 min read

हिना (मेहंदी)( फाल्गुन गीत)

हिना (मेहंदी)( फाल्गुन गीत)

हिना लगी मेरे हाथ सखी रे ,
हिना लगी मेरे हाथ |
साजन नही मेरे पास सखी रे ,
हिना लगी मेरे हाथ ||टेक||

सावन का महीना बरसे बदरियाँ, |
साजन की चाहत मे बिछी चदरिया ||
साजन गये उस पार सखी रे ,
हिना लगी मेरे हाथ||1||

सखी सहेलीयाँ ताना मारे |
रूठ गए क्या साजन तेरे ||
साजन के बदले मिजाज,सखी रे ,
हिना लगी मेरे हाथ ||2||

हिना लगाये जागू सारी रतियां |
साजन नही किससे करूँ बतियां ||
है ए राज की बात सखी रे ,
हिना लगी मेरे हाथ सखी रे ||3||

डॉ पी सी बिसेन
मोती नगर बालाघाट

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