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25 May 2024 · 1 min read

झरोखों से झांकती ज़िंदगी

अपने दरीचे से जब मैं

देखती हूं दुनियां

घनघोर घटाओं की गर्जन से

खडकतीं हैं खिडकियां

पर हसीं लगतीं हैं जब

बयार संग बहकती हैं खिडकियां

बारिश से धुले घरों की रवानगी

या लहलहाते सागर की बानगी

झरोखों से झांकती है जिंदगी

©️ रचना ‘मोहिनी’

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