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23 May 2024 · 1 min read

कल मेरा दोस्त

कल मेरा दोस्त मुझसे रूठ गया
जीते जी ही मुझे छोड़ गया

गुरु था कभी था वो मित्र भी
हर बन्धन से मुक्त हो गया

खुद तो सब्र से काम कर गया
मेरे हिस्से में गम तमाम कर गया

ख़ून के आँसू रुला कर गया
अज़नबी हमें बता कर गया

साथ तोहमत ये लगा कर गया
दोस्ती एक तरफा हैं बता कर गया

गैरो के संग मिलकर
बिना खंजर के वार करके गया

तेरा मेरा रिश्ता एक भूल हैं
ये जातें जातें जता कर गया

लाख फरयाद की थीं मगर
जाना था उसे पीछा छुड़ा कर गया

दोस्ती होतीं नहीं इस दुनिया में सच्ची
झूठी बातों से बहला कर गया

रोयें बहुत हम भुला भी ना सकें
दिल से रिश्ता था मन से उतार कर गया

बता भी नहीं सकते उसका नाम
मेरा नाम लेकर गैर कह कर गया

मैं भी जख्म लेकर बैठी हूँ
जिसपर वो नमक लगाकर गया

खता किया हैं समझ नहीं आया
कुछ बता कर भी नहीं गया

मैं भी भूल जाऊँगी उसे
जो मुझे भुला कर गया

शमा परवीन

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