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23 May 2024 · 1 min read

साथ था

साथ था कभी तेरा मेरा याद हैं के नहीं ,
मुलाकात का दौर था याद हैं के नहीं ।

रूठना मनाना होता था कभी – कभी ,
फिर सब कुछ भूल जाना याद हैं के नहीं ।

नाम एक दूजे का लेते थे साथ सभी ,
एक साथ मुस्कुराना याद हैं के नहीं ।

ना जाने क्या हुआ अचानक बदल गयें तुम ,
पल – पल याद करना याद हैं के नहीं ।

बहुत रोते थे तुम जरा सी बेरुख़ी पर,
बहुत सताया था तुम ने याद हैं के नहीं ।

साथ होंने की ख़ुशी होती थी बहुत ,
दूर जा कर दुखी किया याद हैं के नहीं ।

वज़ह तो बताते खता क्या हुई ,
बेवजह रूलाया याद हैं के नहीं ।

शमा परवीन

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