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23 May 2024 · 1 min read

हिलमिल

हिलमिल

मेरा रंग
चाय में दूध कम
मेरी आँखें
गोधूली में सब घर को भागे
मेरी नाक
अरावली का पहाड़
मेरी मुस्कान
शांत समुंदर में आया तूफ़ान
मेरा मैं
तेरा तू
मिले कभी तो
ढूँढे सुकून
प्राकट्य कुछ नहीं
अदृश्य में छुपा अदभुत रहस्य है कहीं
दूर क्षितिज की गहरी लालिमा
नीलगगन के गहरे रंग
इन्द्रधनुषी सा आभास
लिए है मेरे हिय को थाम
शांत मनोरम
सब ठहरा सा
कुछ मद्धम, कुछ भीगा सा
कानो में घुले कुछ रस मीठा सा
आधा बचपन कुछ बीता सा
मधुरम सी वो तान सुरीली
वो लहकी वो बहकी सी
वो गुड़िया जापानी थी
एक राजा एक रानी थी
बड़ा सरल था जीवन अपना
कुछ अपना कुछ सपना सा ।।

डॉ अर्चना मिश्रा

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