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23 May 2024 · 1 min read

आने वाला कल

आने वाला कल

जीने की चाहत
व्यथाओं से आहत
इस तरह
आज होती जा रही,
जिस तरह
धूप की तपिश
मौसम की दबिश
फूलों को
तार-तार करती जा रही।
है आवश्यकता
हमें और तुम्हें
आशा की शीतल छाया
व बागवान की परवरिश की
जिससे सुरक्षित हो
हमारा आज !
सर्वत्र प्रफुल्लित हो
आने वाला कल।
– डॉ० उपासना पाण्डेय

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