"उम्मीद"
“उम्मीद”
कभी नहीं कहीं नहीं
जाती उम्मीद
हमें छोड़कर,
वो तो हम खुद ही हैं
जो उसे छोड़कर
कहीं दूर चले जाते हैं।
“उम्मीद”
कभी नहीं कहीं नहीं
जाती उम्मीद
हमें छोड़कर,
वो तो हम खुद ही हैं
जो उसे छोड़कर
कहीं दूर चले जाते हैं।