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22 May 2024 · 1 min read

बड़ी तक़लीफ़ होती है

बड़ी तकलीफ़ होती है

भ्रम के चक्रव्यूह में फँस जाता है
जब व्यक्तित्व का फल सफ़ा

तब बड़ी तक़लीफ़ होती है

लोगों की आकांक्षाओं के समन्दर में
जब गहरी पैठ नहीं हो पाती

तब बड़ी तक़लीफ़ होती है

कच्चे मकानों से रिश्तों के ढह
जाने के डर से मन की व्यथा
जब बनती है घुमावदार पेंच

तब बड़ी तक़लीफ़ होती है

तेज़ प्रखर धूप में चलते चलते
जब नहीं जुटा पाते तनिक सी भी छांव

तब बड़ी तक़लीफ़ होती है

ख़ामोश लब आँखों की बातें
जब दिल तक नहीं उतर पाती

तब बड़ी तक़लीफ़ होती है

डॉ दवीना अमर ठकराल दिवि✍️✍️

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