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22 May 2024 · 1 min read

कोई और ठिकाना न मिलेगा

ऐसे न जाओ इन आंखों से निकलकर,
कोई और ठिकाना न मिलेगा।
भटकोगे इस कदर कि कहीं भी आशियाना न मिलेगा।

जाने कितने किस्से लिखे जाएंगे मोहब्बत के मगर,
अपने प्यार का इस जहां में कोई फसाना न मिलेगा।

हम नहीं होंगे तो किसको सताओगे,
फिर कभी ये रूठना मनाना न मिलेगा।

किसको देखोगे चोरी चोरी छिप छिपकर,
फिर ये झूठा बहाना न मिलेगा।

हमसे प्यारा कोई मिल जाए तो कहना,
ये दावा है मेरा कि फिर कहीं ऐसा रूप सुहाना न मिलेगा।

इश्क न करेगा इतना तुमसे, जैसे हमने किया है,
हमारे बाद ये प्यार का खजाना न मिलेगा।

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