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20 May 2024 · 1 min read

बसंत पंचमी

देखो केसरिया चुनर से
सारी धरती सज आई
बसंत पंचमी आई
पीली पीली सरसों देख
धरती भी मुस्काई
टेसू छटा बिखेर रहे थे
तितलियां बागों में आई
रंग बिरंगे फूल देखकर
नई उमंग है छाई
आया बसंत
बदल गई ऋतुएं
धरा पर हरियाली छाई
गली मोहल्ले उड़ी पतंगे
आसमान रंग आई
पेड़ों पर कोयल कुहुकी
अब आम बौर की आई
कचनारों ने पंख खोल कर
पुरवा हवा चलाई
बिखरे महुआ की गंध
चारों ओर है छाई
पवन संग सब खेले होली
यह कैसी पुरवाई
धरती फिर रंग आई

मौलिक एवं स्वरचित
मधु शाह

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