Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
20 May 2024 · 1 min read

सपने जिंदगी सच

सपने जिंदगी सच ।

क्यों गश खाकर गिर पड़े तनहा ,
क्या गुलिस्ता में गुल खिलना भी गवारा नहीं ।

ये रिमझिम मौसम है मर जाने का ,
तुम क्यों गमदिदा हो तुम्हें जीना भी गवारा नहीं ।

कैसे कहोंगे अपने दिल-ए-हालात ,
सुना है तुम्हारे पास अब कोई नया इशारा नहीं ।

गरज बरस कर गुबार भी बैठ गया ,
लोग कहते है आजकल तनहा हो कोई गमगुस्सार भी नहीं ।
तनहा शायर हूँ – यश

Loading...