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18 May 2024 · 1 min read

मेरे हिस्से जब कभी शीशे का घर आता है...

69….
Madiid musamman saalim
faa’ilaatun faa’ilun faa’ilaatun faa’ilun

2122 212 2122 212
मेरे हिस्से जब कभी शीशे का घर आता है
तेरे हाथों में अचानक क्यों पत्थर आता है
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पास रखता था यहाँ मैं दिखाने आइना
हाथ मेरे आज छोटा यहाँ घर आता है
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एक आफत वो हमें रोज चिपकाता रहा
इक शिकन्जा सामने जांच दफ्तर आता है
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चाहने का तुम को मालूम है अंजाम भी
जब धुआँ हो आसमा, वो कतर पर आता है
#
अब उतर जाए मिरे खौफ का आलम यहाँ
मुझको सीधा सादगी बोल अक्सर आता है
#
सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छ.ग.)

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