Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
14 May 2024 · 1 min read

तू ही बता ,तू कैसा

तू ही बता ,तू कैसा इंसान ?

बन्दर जैसी उछलकुद तेरी
कव्वे जैसी नजर हैं तेरी
बेवजह कुत्ते जैसा पसीना पसीना
तू ही बता ,तू कैसा इंसान ?

साप नेवले ,चूहे बील्लीसा खेल तेरा
गिरगिट की तरह तू रंग बदलता
तू खुद बन गया खुद का दुश्मन
भूखे शेर जैसा तू बना हैं शिकारी

गंदगी में डुबकी लगाये
हाथी जैसी बेफिकरी रहता
खाने के दांत लगा दिखने के अलग
शिकार करता साधु के भेष में
तू ही बता ,तू कैसा इंसान ?

गधे जैसा बोझ उठता अज्ञान का
गुलामी करता जाने अनजाने में
वो कहे तो काटता जहर फैलता
धर्म – अधर्म ,सत्य असत्य नहीं पहचानता

तू ही बता ,तू कैसा इंसान ?
अच्छा पिता बना ना भाई
अच्छा पुत्र बना ना पति कसम से
बहुरुपिया बनकर खेल दिखाता

मन की तू हैं एक जादूगर बेशक
चीते जैसी छलांग बेशक और मधुर वाणी
तेरे पीछे दुनिया दीवानी ,तब तक प्यारे
जब तक करनी कथनी का अंतर ना जाने

तू खुद चैन से जीता हैं
ना दुसरो को जीने देता हैं
दिनरात लड़ाई -झगड़ा
तू ही बता ,तू कैसा इंसान ?

प्यारे -दुलारे तेरी अकल कहां गई ?
जमींन खा गई या आसमा निगल गया
सागर जैसी गहराई और परबतसी दृढ़ता
ज़िल झरने के पानी जैसा सुन्दर निर्मल मन था तेरा

Loading...