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10 Jan 2024 · 1 min read

आंखों से अश्क बह चले

आंखों से अश्क बह चले तो यूं छुपा लिए
पलकों को बंद कर लिया और मुस्कुरा दिए

जब भी वफ़ा के नाम पर मन में उठे सवाल
जब भी तुम्हें भुलाने का आया कोई ख़याल
दिल ने तड़प के ये कहा ऐसा न कीजिए
पलकों को बंद कर लिया…

कैसे हैं इम्तिहान ये उल्फ़त के नाम पर
तुमने भी ला दिया मुझे कैसे मुकाम पर
काली घनी है रात और बुझते हुए दिए
पलकों को बंद कर लिया…

रहने दे इश्क़ के अभी थोड़े बहुत भरम
मुझको ख़ुशी नहीं मिली इसका नहीं है ग़म
उसको ख़ुशी मिले मगर जिसे सितम किये
पलकों को बंद कर लिया…

— शिवकुमार बिलगरामी

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