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8 Jan 2024 · 1 min read

ग़ज़ल

कभी मज़बूरियों से हार दिल कमज़ोर मत करना
सफ़र काँटों भरा हो पर ग़ुलों को याद कर चलना/1

बड़ी हो सोच मानव की हिला कोई नहीं सकता
जहाँ बरगद वहाँ तरु और की फ़ीकी रहे तुलना/2

जो झुकना जानता है वो झुकाने का हुनर रखता
किसी भी वृद्ध से मिलना अदब से झुक यहाँ मिलना/3

मिटा दो तुम सजालो तुम मगर सपने सदा देखो
अगर आए बुरा सपना डरो मत सीख ले बढ़ना/4

जलाना दिल मिटाना बिल बुराई है बुरा मानो
हँसे पाकर तुम्हें कोई बनो सुंदर हसीं पलना/5

पसीने की कमाई तो हमेशा सुख सदा देती
बिना जो खाद उगती घास जैसे ही भले खिलना/6

अरे ‘प्रीतम’ लुभाती है जवानी भी ज़ुबानी भी
परे इनसे सजग होकर गुलाबो़ं-सम ज़रा खिलना/7

आर. एस. ‘प्रीतम’

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