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3 Jan 2024 · 1 min read

बदनाम ये आवारा जबीं हमसे हुई है

बदनाम ये आवारा जबीं हमसे हुई है
सच ये है ख़ता तुमसे नहीं हमसे हुई है

हमने ही दिया रंग मुसव्विरा को लहू के
तस्वीर मुहब्बत की हसीं हमसे हुई है

हमने ही दिया हुस्न को पर्दे का चलन भी
तहज़ीब यहांँ पर्दा नशीं हमसे हुई है

हमने ही दिया ख़ून भी ख़ारों को चमन में
गुलज़ार गुलिस्तांँ की ज़मीं हमसे हुई है

हम सर तो कटा देते हैं झुकते नहीं ‘आसी’
तारीख़ मुरत्तब भी कहीं हमसे हुई है

Aasee yusufpuri

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