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3 Jan 2024 · 1 min read

मेरी कलम से…

मेरी कलम से…
आनन्द कुमार

इन्हीं मुस्कानों के बीच अपनी मुस्कान ढूँढता हूँ,
हर रोज़ नई सुबह और नई शाम ढूँढता हूँ ।
जीने के सहारे बहुत होते हैं मगर,
जो दे ज़िन्दगी में मुक़ाम, वहीं अरमान ढूँढता हूँ।

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