जिन्दगी ....
ज़िन्दगी …
उलझनें
बढ़ती गयी
सुलझाने के
फेर में
एक
मकड़ी से
शर्मिन्दा
हो गयी
ज़िन्दगी
सुशील सरना/31-12-23
ज़िन्दगी …
उलझनें
बढ़ती गयी
सुलझाने के
फेर में
एक
मकड़ी से
शर्मिन्दा
हो गयी
ज़िन्दगी
सुशील सरना/31-12-23