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30 Dec 2023 · 1 min read

सृजन

टूटने से क्यों कर डरना
छूटने का भय क्यों करना
अंत ही तो आरंभ का प्रमाण है
टूट टूट बिखर क्यों मरना
टूट कर मिलता नव जीवन
होता है सुंदर सा सृजन

टूटो ज्यों है बूँद टूटती
बादल की बाहों से छूटती
कर पोर पोर धरा सराबोर
खेतिहर की दुआएँ लूटती
खनकी गेहूं की बाली ख़न खन
होता है सुंदर सा सृजन

जब भी कोई बीज टूटता
चीर धरा अंकुर वो फूटता
मिट्टी के नीचे जो टूटा फूटा
बन विटप विशाल व्योम चूमता
डोल रहे तरु कानन कानन
होता है सुंदर सा सृजन

टूटी जो गर्भ नाल की डोरी
अलग हो गई माँ से छोरी
रची गई फिर नई कहानी
चंदा मामा दूध कटोरी
शिशु का भू पर आगमन
होता है सुंदर सा सृजन

पत्ता जो टूटा डाल से
नव किसलय फूटे छाल से
अंबर से तारा जो टूटा
भाग्य चमक उठा भाल से
निश्चित नूतन का अनुगमन
होता है सुंदर सा सृजन

रेखांकन।रेखा
३०.१२.२३

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