Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
27 Dec 2023 · 1 min read

*पाते हैं सौभाग्य से, पक्षी अपना नीड़ ( कुंडलिया )*

पाते हैं सौभाग्य से, पक्षी अपना नीड़ ( कुंडलिया )
_________________________________
पाते हैं सौभाग्य से , पक्षी अपना नीड़
मानव को कब घर मिला ,मिलती केवल भीड़
मिलती केवल भीड़ , अभागे फुटपाथों पर
रहे घुमंतू रोज , टिके रहते हाथों पर
कहते रवि कविराय , सुखी दिखने में आते
कोठी आलीशान , किंतु घर कब बन पाते
——————————————————
रचयिता : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा
रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451
—————————————————-
नीड़ = घोंसला

Loading...