Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
27 Dec 2023 · 1 min read

आखरी मुलाकात

हम मिले
फिर से एक बार
हमने सलीके और शिष्टाचार सांझा किए थे
एक दूसरे से सालो बाद एक पुराना वाक्य दोहराया
“बहुत खुशी हुई आपको इतने सालों बाद देखकर”

पर मेरे भीतर का ब्रह्मांड टूटकर बिखर गया था

थक कर सो गए थे सारे जीव-जंतु
शेर ने राजपाट त्याग कर शहरवास कर लिया हो जैसे
बाज अपने पंख भूल गया हो कहीं
मछलियां डूब कर मरने किनारे आ गई हों
भेड़ियों ने पिंचरों को घर मान लिया था जैसे
सांप अपनी केचुल में वापस जाने की तैयारी में हो

हमारे वाक्य टूटकर खामोश हो चुके थे

शायद आखिरी मुलाकात के यही तौर तरीके हैं ।

Loading...