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21 Dec 2023 · 1 min read

आस

ख़्वाहिशों के महल
बनते रहते हैं ,
हालातो के झोंके इन्हें
बिखराते रहते हैं ,

हसरतों की पतंगें ऊँची उड़़ाने
लेती रहतीं हैं ,
हक़ीक़त के मांझे की धार डोर
काटती रहती है,

फिर भी न जाने क्यूँ ये जुनून
कभी हार नही मानता है ,
हर बार टूटने बिखरने पर भी ऊंची उड़ाने
लेता रहता है,

शायद कुछ कर गुजरने का जज़्बा
अब तक बाकी है ,
दिल में आस की वो सुलगती चिंगारी
अभी भी बाकी है।

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