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21 Dec 2023 · 1 min read

रुख़्सत

इस शहर की यादगारों को
साथ ले चला हूं ,
बीते हुए लम्हों का हिसाब
साथ ले चला हूं ,

रंजिशे, अदावतें छोड़, प्यार
साथ ले चला हूं ,
सरगर्मी – ए – महफ़िल छोड़, तन्हाई
साथ ले चला हूं ,

ज़ुल्मो सितम की दास्ताँ छोड़, सुकून
साथ ले चला हूं ,
दर्दे बेवफ़ाई छोड़, एहसान- ए -वफ़ा
साथ ले चला हूं ,

खुदगर्जी छोड़, एहसास- ए- हमदर्दी
साथ ले चला हूं ,
फ़ितरत छोड़, अख़लाक़
साथ ले चला हूं ,

सोए हुए ज़मीर को जगा, इंसानियत
साथ ले चला हूं ।

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