Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
20 Dec 2023 · 1 min read

माया प्रभु की

🦚
ठंड बहुत है कह कर हम तो, ओढ़ रजाई सो जाते ।
ऐसे भी हैं लोग यहाँ जो, रैन बिताते ठिठुराते ।।
निष्ठुर नाथ आपकी माया, कैसे दृश्य दिखाती है ।
कहीं परसती है मुस्कानें , आँसू कहीं‌ बहाती है ।।

दयादृष्टि रखना भगवन ।
गंगाजल सा कर दो मन ।।

राधे…राधे…!
🌹
महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा ।
***
🌳🦚🌳

Loading...