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12 Dec 2023 · 1 min read

“बिरहनी की तड़प”

डॉ लक्ष्मण झा परिमल

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तुम्हारे बिन अधूरा मैं मेरे बिन तुम अधूरी हो ,

मिलन का योग हो जाए तभी कोई बात पूरी हो !

तुम्हारे बिन अधूरी मैं मेरे बिन तुम अधूरे हो ,

मिलन का योग हो जाए तभी कोई बात पूरी हो !!

कहाँ बैठे हो छुपकर तुम,

मेरी आखियाँ तरसती है !

जरा तुम सामने आयो ,

तभी कोई बात बनती है !!

तुम्हारे बिन अधूरी मैं मेरे बिन तुम अधूरे हो ,

मिलन का योग हो जाए तभी कोई बात पूरी हो !!

नहीं छुपकर मैं बैठा हूँ ,

तुम्हारी याद आती है !

करूँ क्या कुछ नहीं सूझे ,

मुझे रह – रह सताती है !!

तुम्हारे बिन अधूरा मैं मेरे बिन तुम अधूरी हो ,

मिलन का योग हो जाए तभी कोई बात पूरी हो !!

मेरी हालत को तुम देखो ,

मुझे सब ताने देते हैं !

“रहोगी कब तलक यूँही” ,

सभी यह बात कहते हैं !!

तुम्हारे बिन अधूरी मैं मेरे बिन तुम अधूरे हो ,

मिलन का योग हो जाए तभी कोई बात पूरी हो !!

चले आओ मेरे प्रियतम ,

मुझे बस प्यार तुम देदो !

नहीं कुछ चाहिए मुझको ,

मुझे बस साथ तुम देदो !!

तुम्हारे बिन अधूरी मैं मेरे बिन तुम अधूरे हो ,

मिलन का योग हो जाए तभी कोई बात पूरी हो !

तुम्हारे बिन अधूरा मैं मेरे बिन तुम अधूरी हो ,

मिलन का योग हो जाए तभी कोई बात पूरी हो !!

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डॉ लक्ष्मण झा” परिमल”

साउंड हेल्थ क्लिनिक

एस. पी .कॉलेज रोड

दुमका

झारखंड

भारत

12.12.2023

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