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30 Oct 2023 · 1 min read

खून पसीने में हो कर तर बैठ गया

खून पसीने में हो कर तर बैठ गया
इंसाँ है मज़दूर भी थककर बैठ गया

गुस्से में वो नाक फुलाकर बैठ गया
मेरा उस के बाद मुक़द्दर बैठ गया

राज़ की बातें ग़ैरों के मुंह सुन कर
लम्हा भर को मैं चकराकर बैठ गया

जितने मुंह उससे भी ज़ियादा बातें थी
वो थोड़ा क्या मेरे बराबर बैठ गया

अपना बोझ भरम ऐसे रक्खा हमने
चुप होकर आँखों में सागर बैठ गया

रसमन हमने उसको इज़्ज़त बख्शी थी
और वह सीधा सर के ऊपर बैठ गया

मेरे दिल से तुमको कौन निकालेगा
अब दरया में जैसे पत्थर बैठ गया

आज मिरे घर क्या तुम आने वाले हो
सुब्ह सवेरे कागा छत पर बैठ गया

रुत बारिश की कुछ न बिगाड़ सकी उसका
उसके जाने से सारा घर बैठ गया

ऐसे मंज़िल पाने के हालात बने
बीच सफर में अरशद रहबर बैठ गया

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