Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
27 Oct 2023 · 1 min read

दिल समझता नहीं दिल की बातें, - डी. के. निवातिया

दिल समझता नहीं दिल की बातें,
बड़ा नादाँ है चाहता है मुलाकते !

बैचैनी के आलम में जीता रहता है,
काटे से कटती नहीं है अब रातें !

गुम रहता है तेरे ख्वाबो ख्यालो में,
न जाने कैसे है तुझसे ये रिश्ते नाते !

आँखों में बसे है कुछ अमोल लम्हे,
चाहकर भी भूले नहीं भुलाये जाते !

मन ही मन घुटते रहे एक आरसे से,
काश दिल की बात तुमसे कह पाते !

देते अगर वक्त कितना अच्छा होता,
तुम्हारी सुनते कुछ अपनी भी सुनाते

‘धर्म’ को इन्तजार है आज भी तुम्हारा,
अच्छा होता अगर दो घडी मिल जाते !!
***
डी. के. निवातिया

Loading...