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27 Oct 2023 · 1 min read

पलकों की

पलकों की
कोर से टपकतेआँसू
मद्धिम पड़ती साँसे
उलझती डोर सी तेरी यादें
लफ्ज़ हो रहे
धुआं धुआं
तन्हाइयों में भी तन्हा होना
जज्बातों का
बर्फ़ सा सुन्न हो जाना
किस क़दर मुश्किल
होता है तुम बिन जीना

हिमांशु Kulshreshtha

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