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26 Oct 2023 · 1 min read

"ऐ वतन, ऐ वतन, ऐ वतन, मेरी जान"

ऐ वतन, ऐ वतन, ऐ वतन,
ऐ वतन, मेरी जान, ऐ वतन,

तुमसे खिलें आंखों में सपने हजार
तुमसे ही संचित है अपना अधिकार
बिन तेरे नही जंचती जीवन का हार
बिन तेरे नही जीने का कोई आधार
रहे समर्पित तुझपे हर दिल कुर्बान
ऐ वतन, ऐ वतन, ऐ वतन, ऐ वतन
ऐ वतन, मेरी जान, ऐ वतन, ऐ वतन

है तेरा मेरा ये रिश्ता जीवन मरण का
सांस जबतक न टूटे एहसास बंधन का
क्यों हो न कुर्बानियां पावन धरा के लिए
मर मिटूं मैं देश के स्वाभिमान प्यारा के लिए
है नहीं इस मुल्क की एक भी कली बेजुबान
ऐ वतन, ऐ वतन, ऐ वतन,
ऐ वतन, मेरी जान, ऐ वतन।।

रचना- राकेश चौरसिया

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