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23 Oct 2023 · 1 min read

दिखता नही किसी को

गीत..

दिखता नही किसी को कुएं में आज पानी।
गायब -सी हो गई है पुरखों की निशानी।।

रहती चहल-पहल थी चौके पे सुबह-शाम।
रखते थे लोग इसका कोई ना कोई नाम।।
बहती हवा यहाँ थी पहले सुखद सुहानी।
गायब -सी हो गई है पुरखों की निशानी।।

वो दिन अभी भी याद हमें थे करीब जब।
पानी निकाल इससे रहे नित्य पीते सब।।
कहते बुजुर्ग अब भी व्यथा अपनी जुबानी।
गायब- सी हो गई है पुरखों की निशानी।।

कहने को गाँव अब भी मगर बात वो कहाँ।
पहले -सा प्यार दिखता नहीं आज है वहाँ।।
आवेगी नहीं लगता कि गुलशन में रवानी।
गायब -सी हो गई है पुरखों की निशानी।।

पटते कुएं को देख कोई टोकता नहीं।
ऐसा हुआ है क्या जो कोई रोकता नहीं।।
लिख कैसी रहे हम ये तरक्की की कहानी।
गायब -सी हो गई है पुरखों की निशानी।।

दिखता नही किसी को कुएं में आज पानी।
गायब -सी हो गई है पुरखों की निशानी।।

डाॅ. राजेन्द्र सिंह ‘राही’
(बस्ती उ. प्र.)

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