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22 Oct 2023 · 1 min read

दिल से हंसे

उम्मीद के जुगनू ,
फिर से झिलमिलाएं।
दिल से हंसे यूं कि;
दुःखों के दूर्वादल झरजाएं।

कल-कल करती नदियों से,
परोपकार का परिचय पाएं।
दिल से हंसे यूं कि;
दुःखों के दूर्वादल झरजाएं।

बंसीधर की बंसी की धुन मे,
ईश्वर के स्नेह का आनंद उठाएं।
दिल से हंसे यूं कि;
दुःखों के दूर्वादल झरजाएं।

हो नया सवेरा,
आकाश की लालिमा बिखरती हो।
विगहों के नव-गायन मे;
जीवन उत्साह से भर जाए।
दिल से हंसे यूं कि;
दुःखों के दूर्वादल झरजाएं।

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