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21 Oct 2023 · 1 min read

तेरे ख़त

तेरे दिये वो ख़त, मैंने रखे हैं संभाल के।
जिनमें रखा था तूने , दिल निकाल के।

पढ़ता हूं जब भी मैं ,तेरे वफ़ा के वो वादे
समझ आया है अब ,क्या थे तेरे इरादे।

यकीं नहीं होता कि , करेगी तू बेवफाई
मेरे कंधे इश्क की ,होगी जग हंसाई।

कसूर तेरा नहीं ,सारा कसूर बस मेरा था
वादे तेरे थे झूठे , मगर यकीं तो मेरा था।

तेरी दिलनशीं वो बातें,तेरी झूठी वो कसमें
मंझधार छोड़ मुझे, ग़ैर से निभाई रस्में।

सुरिंदर कौर

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