Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
20 Oct 2023 · 1 min read

2627.पूर्णिका

2627.पूर्णिका
🌷 मुकरना था जिसे मुकर गए 🌷
212 2121 212
मुकरना था जिसे मुकर गए ।
सुधरना था जिसे सुधर गए ।।
जिंदगी का मजा न ले सके।
अखरना था जिसे अखर गए ।।
है दुखी होशियार जो बने।
सरकना था जिसे सरक गए।।
बेरहम बन कठोर पत्थर दिल।
मसलना था जिसे मसल गए।।
आज खेदू न देख चेहरा।
मचलना था जिसे मचल गए ।।
……….✍डॉ .खेदू भारती”सत्येश”
20-10-2023शुक्रवार

Loading...