भिखारिन
देवेंद्र प्रताप वर्मा 'विनीत'
हर मुफलिस को दीजिये, वर्षगाँठ पर दान ।
नवनिधि क्षणिकाएँ---
रामनाथ साहू 'ननकी' (छ.ग.)
अब किसी मुल्क में कोई जंग न होने पाए।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
तेरे कहने पे गायब या नुमाया हो नहीं सकती
आजकल झूठ सच पर है भारी यहाँ।
*परस्पर मित्र पति-पत्नी, जहॉं दोनों कहाते हैं (मुक्तक)*
गागर में सागर भर पाना मुश्किल है,
Anamika Tiwari 'annpurna '
*आऍंगे मौसम नए, होगी नई बहार (कुंडलिया)*
विद्यालय संजोती, दिव्य ज्ञान सरिता- हरिप्रिया छंद
'ईश्वर की आराधना, सुर है लोकातीत।
बिखरे रिश्तों से उठती ख़मीर क्या करता
कुछ थे नए नए खिले ,और कुछ अधखिली कलियां
संस्मरण आगे "एक बचपन मेरा भी" का अंश
'युद्ध की अरघनी टटोलता स्त्री का प्रेम'