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15 Oct 2023 · 1 min read

ऐसे हैं हमारे राम

रोम-रोम में रमते फिर भी
तीनों लोकों से न्यारे राम,
ऐसे हैं हमारे राम…
(१)
किसी मंदिर-मस्जिद से उनका
दूर-दूर तक न कोई वास्ता
न तो अयोध्या में जन्मे
न ही दशरथ के प्यारे राम
ऐसे हैं हमारे राम…
(२)
जाति कोई हो-वर्ण कोई हो
देश कोई हो-धर्म कोई हो
दुनिया भर के पीड़ितों के
केवल एक सहारे राम
ऐसे हैं हमारे राम…
(३)
इस जंगल से उन पहाड़ों से
इस सागर से उन सितारों से
कुदरत के हसीं नज़ारों से
कबसे तुम्हें पुकारे राम
ऐसे हैं हमारे राम…
(४)
अब सुन सके तो सुन ले उनको
तू सब छोड़कर चुन ले उनको
मन के भीतर झांक वहीं से
राह तेरी निहारे राम
ऐसे हैं हमारे राम…
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Shekhar Chandra Mitra
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