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15 Oct 2023 · 1 min read

वहशीपन का शिकार होती मानवता

जब तक रहे मानस शुद्ध
तब तक नहीं कोई युद्ध
जब मानस होता है कुंद
तब पसरे शत्रुता की धुंध
कत्ल ओ गारद वहशीपन
का शिकार होती मानवता
साज़िश, अविश्वास, नफ़रत
से पग पग पे इंसां सिसकता
हे प्रभु जग के खलनायकों की
मति से हरो शत्रुता का भाव
ताकि जग में कहीं दिखे नहीं
अमानवीय करतूतों के घाव

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