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11 Jan 2024 · 1 min read

सांस्कृतिक संक्रांति

ठण्ड से छुई-मुई
धूप बासंती हुई
सूर्य की नजदीकियों से
धरा फिर हर्षित हुई ।

जनमन में राम फिर से
जागे संक्रान्ति आई
धर्म संस्कृति जागरण ने
कोहरे से मुक्ति पाई ।

प्राकृतिक क्रम में अगर
असहज दिन आयें फिर से
राम से मर्यादित रहें
रहें, हो भयमुक्त भय से ।

विरासत को चालना दें
जो अहितकर छोड़ दें
चित्त को रंग कर वसंती
धर्म* पथ पर मोड़ दें ।

* कर्तव्य

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