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7 Oct 2023 · 1 min read

महल था ख़्वाबों का

ये दिल किसी ख़्वाब की
जागीर हो नहीं पाया।
महल था ख्वाबों का
जो तामीर हो नहीं पाया ।।

डाॅ फौज़िया नसीम शाद

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