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7 Oct 2023 · 1 min read

क्षणिका सी कविताएँ

(1)
अहम्
अहंकार अर्थी शब्द से
‘अ’ और ‘ म’ का हलन्त हटाकर
कहो पास आकर
वह शब्द
जो मैं सुनना चाहता हूँ
और तुम कहना नहीं चाहते ।

(2)
कल रात सपने में
देखा मैंने
उसका ढाँचा
मैंने ओंठ सी लिये
यह सोचकर कि कहीं
निकल न जाये मुँह से
प्रिये ….।

(3)
हर सजग व्यक्तित्व
ढ़ूढ़ता है उसको
जो कहे कुछ करो
कुछ करके मरो ।

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