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5 Oct 2023 · 1 min read

दृढ़

छला जाना तो प्रारब्ध में था,
मेरे कर्मों ने कभी मुझको हारने न दिया।
व्याध बैठे है यहां घर घर में,
एक निरीह को भी मैंने मारने न दिया।।
जय हिंद

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