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30 Sep 2023 · 1 min read

"बिन स्याही के कलम "

“बिन स्याही के कलम ”

कविता के रंग, कलम से न धूँढ़ो,
मन की गहराइयों से बातें लिखो।

प्रेम की बातें लिखो, खुशियों का संग,
कविता के ख्वाब, बिना स्याही के रंग।

“पुष्पराज फूलदास अनंत”

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