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2 Aug 2023 · 1 min read

संत पुरुष रहते सदा राग-द्वेष से दूर।

संत पुरुष रहते सदा राग-द्वेष से दूर।
प्रेम हृदय का बाँटते रहते वे भरपूर।।
राम नाम के नूर की सदा जोहते बाट,
नहीं चाहते कभी भी वे जन्नत की हूर।।

;;;; महेश चन्द्र त्रिपाठी

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