दोहा
दोहा
ब्रजमंडल घन श्याम हो, मैं उस ब्रज का मोर।।
पीहू-पीहू बोलकर, मैं नाचूँ चहुँ ओर।
©दुष्यन्त ‘बाबा’
दोहा
ब्रजमंडल घन श्याम हो, मैं उस ब्रज का मोर।।
पीहू-पीहू बोलकर, मैं नाचूँ चहुँ ओर।
©दुष्यन्त ‘बाबा’