Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
31 Jul 2023 · 1 min read

भक्ति की राह

भ्रम में जीने को विवश
है जगत का हर जीव
ईश्वर की माया से घिरा
वह हर तरफ से अतीव
सुख, दुख, हर्ष, विषाद
का चक्र चलता लगातार
ऊपर अनंत में बैठा प्रभु
ही इन सबका है दातार
ऋषि,मुनि,सिद्ध संत सब
दिखा गए भक्ति की राह
इसके बल पर ही मनु को
मिले सुख शांति अथाह
ईश्वर की कृपा से ही चले
मन पकड़ भक्ति की राह
अन्यथा भटके इधर उधर
बना उद्विग्नता का प्रवाह
हे प्रभु भ्रम से दूर रखके
देना निज चरणों में प्रीति
आप की कृपा से पा सकूं
इस भव सागर में सद्गति

Loading...