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14 Jul 2023 · 1 min read

फितरत फरेब की

हमारी बात क्या और क्या औकात दुनियां में।।
पड़े जो आफते सर पे ,सिकंदर भी मिट जाते हैं।

दुहाई राम की देकर , कसम लेते हैं अल्ला की।
सियासत करने वाले , धर्म में सबको लड़ाते है।

दिखाते प्यार ऊपर से कत्ल अंदर से करते हैं।
बनते हैं जो सगे ज्यादा वो अक्सर लूट जाते हैं ।

मिसाले अमन की देते दबाते हैं गले सबके।
धर्म के नामों पे मंदिरवमस्जिद टूट जाते हैं।

नेता जी वोट की खातिर रखते ईमान भी गिरवी।
चले जब मंत्र न कोई ,तो साधु ये बन जाते हैं।

ठगी जाती ये जनता , सबके विश्वास खोते है।
गरम पानी के ,चश्मे से , गुस्से फूट जाते हैं।

रखो ईमान थोड़ा सा , कहे सबसे यहीं सरिता।
न हो विश्वास रिश्तो में तो बंधन छूट जाते हैं।

सरिता सिंह

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