Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
15 Jun 2023 · 1 min read

जीने का हुनर

जीने का हुनर सीख लीजिये
आनंद दीजिये आनंद लीजिये
अच्छे की इज्जत कीजिये बेशक आधी
बुरे को सम्मान दुगुना दीजिये
अच्छे को प्रोत्साहन दीजिये कर्म से
बुरे को मारिये दुगुने सम्मान की शर्म से
ये है एक अलग ही धारा बन्धु
इस पर एक कदम चलकर तो देखिये
जो बुरा है उसके है एहसान कुछ इस कदर
हम है उससे बिलकुल बेखबर
बुरे के कारनामों से बेशक हम चिढ़ जाते हैं
परन्तु अच्छे उन्ही की बदौलत सम्मान पाते हैं
रावण यदि सीता जी का हरण न कर पाते
राम जी इतनी लीलाओं का चरण न कर पाते
कैकयी के हाथ आई बदनामी है ।
राम को मिला सम्मान उससे , ये तो गुमनामी है ।
आपको प्रेरणा नहीं दे रहा बुरा बनने की ।
बस कह रहा हूँ बुरे के अभिनय को समझने की
बुरे लोगों न नफरत से देखिये
बल्कि उन्हें खूब सम्मान दीजिये
अच्छा तो अपनी अच्छाई से तर जायेगा
पर बुरा शायद आपके सम्मान से बदल इस कदर जायेगा
निचोड़ पंक्तियों का यही है
अच्छे को चाहिए प्रोत्साहन और प्यार
बुरे को चाहिए दुगुने सम्मान का दुलार
कई बुजुर्गों ने ये विधि अपनायी है
आवाज पहुंचाने को उनकी ही तो मैंने कलम चलायी है।
न मजा आये पंक्तियों में , सुनते ही भुला देना
अगर पार जाये दिल के सीधे , आगे भी सन्देश पहुंचा देना

Loading...