Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
15 Jun 2023 · 1 min read

रूठी प्रियसी

हे प्रिये तुझे अहसास नहीं
मेरे दर्द का तुझे अहसास नहीं
जिंदगी का तुझे अहसास नहीं
समय सागर से मिलेगा एक दिन
इसका तुझे अहसास नहीं
भोली भाली कलिया सी तू
पूरब पश्चिम का अहसास नहीं
हर समय सोचती है तू
जिंदगी तो नाव बनी है
पतवार का तुझे अहसास नहीं
डूबते तिरते पथिक सी बनी
किनारे का तुझे अहसास नहीं
कैसे खड़ी हो तुम
समाज का तुम्हे अहसास नहीं
अपनी ही धुन में एठी खड़ी
कठिन जीवन का अहसास नहीं
‘अंजुम’ जीवन की रेल जा रही
तुम्हे वक्त का अहसास नहीं
हे प्रिये तुम्हे अहसास नहीं
मेरे दर्द का अहसास नहीं

नाम-मनमोहन लाल गुप्ता ‘अंजुम’
मोबाइल-9927140483

Loading...