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15 Jun 2023 · 1 min read

मेरे इंतज़ार में मेरा चांद

मेरे इंतज़ार में मेरा चांद छत पर दिखाई देता है
देर हो जाने पर बेचैन चौखट पर दिखाई देता है
मुझे देखकर तुरंत वो तमतमाई घर में जाती है
खुश होकर वो नाराजगी का दिखावा करती है।

घर में सोफे पर वो जाकर गुमसुम बैठ जाती है
मेरे बोलने पर वो ना सुनने का बहाना करती है
मेरे बहुत मनाने के बाद वो मेरी ओर देखती है
फिर सीने से लगकर वो खूब शिकायतें करती है

जाकर किचन में वो ठंडे खाने को गर्म करती है
तहज़ीब से परोसती है लज़ीज़ मोहब्बत अपनी
फिर शुरू हो जाती हैं बाते उसकी दिन भर की
मेरे जाने के बाद जो आज घर से नहीं निकली

लगता है जब भी बातों से ये रात गुजर जाएगी
लबों को उसके चूम के उसे ख़ामोश कर देता हूं
झुक जाती हैं पलकें उसका मन थिरक उठता है
झरने सा फिर मुझपे बहता है बस यौवन उसका।

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